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किडनी उपचार

डॉ. बोरले जिन किडनी रोगों की जाँच और इलाज करते हैं, हर एक की आसान भाषा में जानकारी। यह सामान्य जानकारी है, डॉक्टर के परामर्श का विकल्प नहीं।

डॉ. बोरले किन बीमारियों का इलाज करते हैं

  • किडनी प्रत्यारोपण
  • एक्यूट और क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़
  • क्रिटिकल केयर नेफ्रोलॉजी
  • हीमोडायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस
  • डायबिटीज़ से होने वाली किडनी बीमारी
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • किडनी स्टोन (पथरी)
  • मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI)
  • किडनी बायोप्सी
  • यूरोलॉजिकल प्रक्रियाएँ
  • नेफ्रोलॉजिकल और एंडोवैस्कुलर प्रक्रियाएँ
चित्र: क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD)

क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD)

क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD) में किडनी की कार्यक्षमता महीनों या सालों में धीरे-धीरे घटती है। यह अक्सर डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी होती है, और शुरुआती अवस्था में ज़्यादा लक्षण नहीं दिखते, इसलिए यह आमतौर पर नियमित खून और पेशाब की जाँच में पकड़ में आती है।

उपचार में कारण पता करना, बीमारी की अवस्था तय करना, उसकी बढ़त धीमी करना और खून की कमी (एनीमिया), शरीर में पानी जमा होना तथा हड्डियों और खनिजों में बदलाव जैसी जटिलताओं का प्रबंधन शामिल है।

अस्पताल में: खून और पेशाब की जाँच के साथ नियमित समीक्षा, और ज़रूरत हो तो डायलिसिस या प्रत्यारोपण की पहले से योजना।

चित्र: किडनी प्रत्यारोपण

किडनी प्रत्यारोपण

किडनी फ़ेल होने वाले कई मरीज़ों के लिए लंबे समय तक डायलिसिस की तुलना में किडनी प्रत्यारोपण से जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इसके लिए किडनी लेने वाले मरीज़ और डोनर, दोनों की सावधानी से जाँच ज़रूरी है।

प्रत्यारोपण के बाद किडनी की कार्यक्षमता पर नज़र रखने, रिजेक्शन रोकने वाली दवाओं को समायोजित करने और संक्रमण व अन्य दुष्प्रभावों पर ध्यान रखने के लिए जीवनभर फ़ॉलो-अप ज़रूरी है।

अस्पताल में: किडनी लेने वाले मरीज़ और डोनर की प्रत्यारोपण-पूर्व जाँच, और ट्रांसप्लांट फिजिशियन के रूप में डॉ. बोरले द्वारा प्रत्यारोपण के बाद लंबा फ़ॉलो-अप।

चित्र: हीमोडायलिसिस

हीमोडायलिसिस

जब किडनी खून को पर्याप्त रूप से साफ़ नहीं कर पाती, तब हीमोडायलिसिस में मशीन और फ़िल्टर की मदद से खून साफ़ किया जाता है। एक्यूट किडनी इंजरी में इसकी अचानक ज़रूरत पड़ सकती है, या किडनी फ़ेल होने पर इसे नियमित रूप से करना पड़ता है।

नियमित हीमोडायलिसिस आमतौर पर हफ़्ते में कुछ बार होता है, और साथ में खून की जाँच, शरीर में पानी का संतुलन और डायलिसिस एक्सेस की नियमित समीक्षा की जाती है।

अस्पताल में: आपातकालीन और नियमित डायलिसिस के लिए अस्पताल की अपनी डायलिसिस यूनिट, अस्पताल के आईसीयू के सहयोग से।

चित्र: पेरिटोनियल डायलिसिस

पेरिटोनियल डायलिसिस

पेरिटोनियल डायलिसिस (PD) में पेट की अंदरूनी परत को प्राकृतिक फ़िल्टर की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसे घर पर किया जा सकता है, इसलिए कई मरीज़ों को बार-बार अस्पताल नहीं आना पड़ता और उनकी दिनचर्या काफ़ी हद तक बनी रहती है।

मरीज़ और परिवार के सदस्यों को एक्सचेंज सुरक्षित तरीके से करने का प्रशिक्षण दिया जाता है, और डायलिसिस कितना अच्छा काम कर रहा है यह जाँचने के लिए नियमित समीक्षा होती है।

अस्पताल में: PD के लिए जाँच, प्रशिक्षण और निगरानी। डॉ. बोरले के पास पेरिटोनियल डायलिसिस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया का पेरिटोनियल डायलिसिस प्रमाणपत्र है।

चित्र: डायबिटीज़ से होने वाली किडनी बीमारी

डायबिटीज़ से होने वाली किडनी बीमारी

डायबिटीज़ किडनी की बीमारी का एक प्रमुख कारण है। किडनी को शुरुआती नुकसान अक्सर कोई भी लक्षण दिखने से पहले पेशाब में प्रोटीन आने के रूप में दिखता है।

इसे जल्दी पकड़ लेने पर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और किडनी की रक्षा करने वाली दवाओं में बदलाव करके आगे के नुकसान को धीमा करने में मदद मिलती है।

अस्पताल में: डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए नियमित पेशाब और खून की जाँच, और इलाज कर रहे डॉक्टर के साथ तालमेल से देखभाल।

चित्र: हाई ब्लड प्रेशर और किडनी

हाई ब्लड प्रेशर और किडनी

हाई ब्लड प्रेशर समय के साथ किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है, और किडनी की बीमारी ब्लड प्रेशर को और बढ़ा सकती है। एक को नियंत्रित करने से दूसरे की भी रक्षा होती है।

अगर ब्लड प्रेशर कम उम्र में शुरू हो या कई दवाओं के बावजूद ज़्यादा बना रहे, तो किडनी से जुड़े (सेकेंडरी) कारण की जाँच ज़रूरी हो सकती है।

अस्पताल में: हाई ब्लड प्रेशर के किडनी से जुड़े कारणों की जाँच और ब्लड प्रेशर का लंबे समय तक प्रबंधन।

चित्र: किडनी स्टोन (पथरी)

किडनी स्टोन (पथरी)

किडनी स्टोन से तेज़ दर्द, पेशाब में खून या संक्रमण हो सकता है। कुछ पथरी अपने आप निकल जाती है; कुछ को निकालने के लिए प्रक्रिया करनी पड़ती है।

मौजूदा पथरी के इलाज के साथ यह पता लगाना भी मददगार है कि पथरी क्यों बन रही है, ताकि खान-पान, पानी की मात्रा या दवाओं से नई पथरी बनने की संभावना कम की जा सके।

अस्पताल में: पथरी के आकार, स्थान और कारण की जाँच, और प्रक्रिया की ज़रूरत होने पर यूरोलॉजिकल उपचार का समन्वय।

चित्र: किडनी बायोप्सी और इंटरवेंशनल नेफ्रोलॉजी

किडनी बायोप्सी और इंटरवेंशनल नेफ्रोलॉजी

किडनी बायोप्सी में किडनी के ऊतक का छोटा सा नमूना लेकर कुछ किडनी रोगों का सटीक कारण पता किया जाता है, जैसे पेशाब में बिना कारण प्रोटीन या खून आना, या किडनी की कार्यक्षमता अचानक घट जाना। इसके नतीजे से आगे का इलाज तय होता है।

इंटरवेंशनल नेफ्रोलॉजी में वे प्रक्रियाएँ शामिल हैं जो नेफ्रोलॉजिस्ट स्वयं करते हैं, जिनमें डायलिसिस से जुड़ी और एंडोवैस्कुलर प्रक्रियाएँ शामिल हैं।

अस्पताल में: निदान के लिए किडनी बायोप्सी; इंटरवेंशनल और एंडोवैस्कुलर प्रक्रियाओं के लिए अस्पताल की कैथलैब और ऑपरेशन थिएटर।

नेफ्रोलॉजिस्ट को कब दिखाएँ

अगर आपको नीचे दी गई कोई बात महसूस हो, या आपके डॉक्टर ने भेजा हो, तो किडनी विशेषज्ञ से परामर्श लें।

  • पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
  • झागदार पेशाब, या पेशाब में खून
  • सामान्य से बहुत कम पेशाब होना
  • रिपोर्ट में क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ या पेशाब की जाँच असामान्य
  • कई सालों से डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर
  • दवाओं के बावजूद ब्लड प्रेशर ज़्यादा रहना
  • बार-बार पथरी या पेशाब का संक्रमण
  • परिवार में किडनी रोग का इतिहास

आपात स्थिति में, जैसे तेज़ साँस फूलना, बहुत कम या बिल्कुल पेशाब न होना, या भ्रम की स्थिति में, तुरंत नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ।

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